श्लोक - १२५०

त्यक्त्वाऽस्मान् गतवन्तं तं प्रियं चित्ते निवेश्य ।
स्मृत्वा देह: कृशे भूत्वा शोभाविरहितोऽभवत् ॥
Tamil Transliteration
Thunnaath Thurandhaarai Nenjaththu Utaiyemaa
Innum Izhaththum Kavin.
| Section | भाग–३: काम-काण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अध्याय 121 to 133 |
| chapter | मनस्येव कथनम् |