श्लोक - ७०२

परिचगतं भावमिङ्गितै: संशयं विना ।
ज्ञातुं समर्थो दैवेन तुल्य एव विभाव्यताम् ॥
Tamil Transliteration
Aiyap Pataaadhu Akaththadhu Unarvaanaith
Theyvaththo Toppak Kolal.
| Section | भाग–२: अर्थ-काण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अध्याय 051 to 060 |
| chapter | इङ्गितपरिज्ञानम् |