श्लोक - ७०३

मुखनेत्रस्पन्दनादिबाह्यचिह्ने: पराशयम् ।
यो वेत्ति तस्मै वित्तादि दत्वा तं स्ववशे कुरु ॥
Tamil Transliteration
Kurippir Kurippunar Vaarai Uruppinul
Yaadhu Kotuththum Kolal.
| Section | भाग–२: अर्थ-काण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अध्याय 051 to 060 |
| chapter | इङ्गितपरिज्ञानम् |