श्लोक - २८२

निषिद्धस्मरणेनापि दोष: स्यादिति कथ्यते।
अज्ञात्वैवापहर्तव्यमिति त्याज्या मतिस्तत:॥
Tamil Transliteration
Ullaththaal Ullalum Theedhe Piranporulaik
Kallaththaal Kalvem Enal.
| Section | भाग–१: धर्मकाण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अधिकार 021 to 030 |
| chapter | चौर्यनिषेध: |