श्लोक - २४५

दयार्द्रहृदयो भूत्वा दु:खं नाप्नोति भूतले।
निदर्शनं भवेदत्र लोकोऽयं प्राणिसङ्कुल:॥
Tamil Transliteration
Allal Arulaalvaarkku Illai Valivazhangum
Mallanmaa Gnaalang Kari.
| Section | भाग–१: धर्मकाण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अधिकार 021 to 030 |
| chapter | दया |