श्लोक - १७४

जित्वा पञ्चेन्द्रियग्रामं तत्वज्ञानसमन्विता: ।
ज्ञात्वापि स्वक दारिद्र्यमलुब्धा: परवस्तुषु ॥
Tamil Transliteration
Ilamendru Veqkudhal Seyyaar Pulamvendra
Punmaiyil Kaatchi Yavar.
| Section | भाग–१: धर्मकाण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अधिकार 011 to 020 |
| chapter | अलोभ: |