श्लोक - ५६५

अप्रसन्नमुखो नृणामगम्य: सुलभेन य: ।
महीपालस्तस्य वित्तं भूताविष्टमिव वृथा ॥
Tamil Transliteration
Arunjevvi Innaa Mukaththaan Perunjelvam
Peeykan Tannadhu Utaiththu.
| Section | भाग–२: अर्थ-काण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अध्याय 039 to 050 |
| chapter | निर्भयत्वन् |