श्लोक - ५५६

विन्दते सुस्थिरां कीर्ति भूपो धर्मेण पालयन् ।
अनीत्या पालयन् राजा नष्टकीर्तिर्भविष्यति ॥
Tamil Transliteration
Mannarkku Mannudhal Sengonmai Aqdhindrel
Mannaavaam Mannark Koli.
| Section | भाग–२: अर्थ-काण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अध्याय 039 to 050 |
| chapter | अनीत्यापालनम् |