श्लोक - २१५

श्लोक 215
श्लोक #२१५
जलपूर्णतटाकेन भवन्ति सुखिनो जना:।
लोकोपकारिणो भाग्यं लोकसौख्यं प्रयच्छति॥

Tamil Transliteration
Ooruni Neernirain Thatre Ulakavaam
Perari Vaalan Thiru.

Sectionभाग–१: धर्मकाण्ड
Chapter Groupअधिकार 011 to 020
chapterलोकोपकारिता