श्लोक - १०६१

कापट्यमन्तरा हर्षपूर्वकं दामकिरणम् ।
अग्रेऽपि याचनाभाव: श्रेष्ठ: कोटिगुणो मत: ॥
Tamil Transliteration
Karavaadhu Uvandheeyum Kannannaar Kannum
Iravaamai Koti Urum.
| Section | भाग–२: अर्थ-काण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अध्याय 101 to 108 |
| chapter | याचनाभीति: |