श्लोक - १०६२

केषांचिद्याचनावृत्तिमीश: शिरसि चेल्लिखेत् ।
लोककर्ता निर्दयोऽसौ स्वयं भवतु याचक: ॥
Tamil Transliteration
Irandhum Uyirvaazhdhal Ventin Parandhu
Ketuka Ulakiyatri Yaan.
| Section | भाग–२: अर्थ-काण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अध्याय 101 to 108 |
| chapter | याचनाभीति: |