श्लोक - ८४१

विद्यमानेष्वभावेषु ज्ञानाभावो व्यथाकर: ।
अन्याभावान् वेत्ति लोको णाभावत्वेन् सर्वदा ॥
Tamil Transliteration
Arivinmai Inmaiyul Inmai Piridhinmai
Inmaiyaa Vaiyaa Thulaku.
| Section | भाग–२: अर्थ-काण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अध्याय 91 to 100 |
| chapter | अल्पज्ञत्वम् |