श्लोक - ७९१

स्नेहे कृते पुनस्तस्य परित्यागो न युज्यते ।
तस्मादनालोच्य मैत्रीकरणं जनयेत् व्यथाम् ॥
Tamil Transliteration
Naataadhu Nattalir Ketillai Nattapin
Veetillai Natpaal Pavarkku.
| Section | भाग–२: अर्थ-काण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अध्याय 91 to 100 |
| chapter | स्नेह्अपरीक्षा |