श्लोक - ७५१

अनर्हानप्यर्हतमान् कर्तुं येन धनेने तु ।
शक्यते तादृहाद्चित्तात्, अन्यत् किं सार्थकं भवेत् ॥
Tamil Transliteration
Porulal Lavaraip Porulaakach Cheyyum
Porulalladhu Illai Porul.
| Section | भाग–२: अर्थ-काण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अध्याय 071to 080 |
| chapter | अर्थार्जनोपाय: |