श्लोक - १७८

यो ऽन्यदीयं वस्तुजातमपहर्तु न काङ्क्षति ।
न क्षीयते तस्य भाग्यं भूय एवाभिवर्धते ॥
Tamil Transliteration
Aqkaamai Selvaththirku Yaadhenin Veqkaamai
Ventum Pirankaip Porul.
| Section | भाग–१: धर्मकाण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अधिकार 011 to 020 |
| chapter | अलोभ: |