श्लोक - १११६

नारीमुखनिशानाथमेदज्ञानविवर्जिता: ।
दिवि तारा: स्वप्रदेशाद् भ्रान्ता: किन्तु भ्रमन्त्यहो ॥
Tamil Transliteration
Madhiyum Matandhai Mukanum Ariyaa
Padhiyin Kalangiya Meen.
| Section | भाग–३: काम-काण्ड |
|---|---|
| Chapter Group | अध्याय 109to 120 |
| chapter | लावण्यमहिमा |